Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा
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Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

दोस्तों किसी ने सही ही कहा है। अगर आप अपना पैसा उन चीजों को खरीदने में बर्बाद करते है। जिनकी आपको जरूरत नहीं है तो आपकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी आयेगा। जब आपको वे चीजे बेचनी पड़ेगी। जिनकी आपको जरूरत है। इतना ही नहीं जरूरत के समय आप अपनी चीजों को कम दाम पर भी बेचने के लिए तैयार हो जाएंगे। यही बात आपको अच्छे तरिके से समझाने के लिए मैं आपको एक Kahani in Hindi सुनाता हूँ। Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा
Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

एक बार की बात है। एक किसान मजे से अपनी जिंदगी जी रहा था। जब भी उसे उसकी फसलों के पैसे मिलते थे। वह उनसे तरह – तरह की चीजे खरीद लेता था। वह ना तो पैसे बचा रहा था और ना ही उसने अपने भविष्य के लिए कुछ पैसे जोड़ कर रखे थे।

समय बीत रहा था और उसके बच्चे बड़े हो रहे थे। आप तो जानते ही है की समय कितनी तेजी से आगे बढ़ता है। उसके बच्चो की पढ़ाई पर ज्यादा पैसे खर्च होने लगे। साथ ही साथ उसकी एक बेटी की उम्र शादी लायक हो चुकी थी।

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कोई पैसा न होने के कारण उसकी समझ में नहीं आ रहा था की पैसों का इंतज़ाम कैसे होगा इसलिए उसने अपनी जमीन बेचने का फैसला लिया।

वह अपनी जमीन बेचने के लिए एक जमींदार के पास गया। जमींदार ने उससे उसकी जमीन की कीमत पूँछी। किसान बोला – मैं ५० हजार रुपयों में आपको यह जमीन बेच दूँगा। यह सुनकर वह जमींदार सोचने लगा।

उस किसान को लगने लगा की यह जमींदार जमीन नहीं खरीदेगा इसलिए वह बोल पड़ा – अगर आप ५० हजार रुपयों से कम भी देंगे तो भी तो आपको यह जमीन बेच दूँगा।

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सब कुछ सुनने के बाद वह जमींदार बोला – तुम्हारी इस जमीन की कीमत ५० हजार नहीं बल्कि २ लाख रूपये है। मैं तुम्हे इस जमीन के लिए २ लाख रूपये दूँगा लेकिन उससे पहले मुझे बताओ की ऐसी कौन सी जरूरत आप पड़ी की तुम अपनी जमीन इस्ते सस्ते में बेचने के लिए तैयार हो गए।

वह किसान बोला – मेरे बच्चो की पढ़ाई का खर्चा बहुत अधिक बढ़ गया है और मुझे अपनी एक बेटी की शादी भी करनी है। मैंने अपनी जिंदगी में कुछ ऐसे खर्चे किये। जो जरुरी नहीं थे। अगर मैं उन पैसों को बचा पाटा तो मुझे अपनी जमीन नहीं बेचनी पड़ती।

यह सुनकर वह जमींदार बोला – यह तो बहुत ही छोटी सी समस्या है। इसके लिए तुम्हे अपनी जमीन बेचने की जरूरत नहीं है। तुम अपनी बेटी की शादी की तैयारी करो। सभी गाँव वाले मिलकर तुम्हारी बेटी की शादी के लिए पैसे इकठ्ठा करेंगे और अपने खेत में लगी फसलों को बेचकर तुम अपने बच्चो की पढ़ाई का खर्चा उठा सकते हो।

Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

दोस्तों इस Hindi Kahani से मैं आपको यह समझाना चाहता हूँ की जिंदगी में कभी भी किसी की मजबूरी न खरीदे। अगर वह जमींदार चाहता तो उस किसान की २ लाख रूपये की जमीन, ५० हजार रूपये में खरीद सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया क्योकि,

जब भी आप किसी की मजबूरी खरीदते है तो आपकी जिंदगी और घर की सुख शांति ख़त्म हो जाती है। आपकी सोच बदल जाती है। जिसका प्रभाव सिर्फ आप पर ही नहीं बल्कि आपकी आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ता है इसलिए कभी भी किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाओ। Kahani in Hindi | मैं 50 हजार नहीं 2 लाख रुपये दूँगा

दोस्तों ये Kahani in Hindi हमे सुरेश जी ने भेजी है। इसके लिए इनका दिल से धन्यवाद।

Note – The Motivational Story and Inspirational Story shared here is not my original creation. I have read or heard it before and I am just providing a Hindi version of the same with some modifications. I just want to help the people to get more easily through difficult times. Thank You

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